दोस्तों, क्या आपको भी लगता है कि Indian Constitution याद करना किसी पहाड़ चढ़ने जैसा है? असल में, ये सिर्फ कानून की किताब नहीं है, बल्कि हमारे देश का “Operating System” है। आज हम Articles, Amendments और DPSP को इतने आसान तरीके से समझेंगे कि आप Exams में कभी कंफ्यूज नहीं होंगे। चलिए, शुरू करते हैं!
1. भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद (Important Articles)
हमारे संविधान में शुरुआत में 395 Articles, 22 Parts और 8 Schedules थे। समय के साथ नए बदलाव आए, पर परीक्षा के लिए आपको सब याद करने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ इन “VIP” अनुच्छेदों पर ध्यान दें:
1.1 मूल अधिकार (Fundamental Rights) – अनुच्छेद 12 से 35
- अनुच्छेद 14 – Equality before Law: कानून की नज़र में सब बराबर हैं, चाहे वो कोई बड़ा नेता हो या आम नागरिक।
- अनुच्छेद 15 – Prohibition of Discrimination: धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा।
- अनुच्छेद 19 – Freedom of Speech: आपको बोलने, घूमने और अपना मनपसंद पेशा चुनने की पूरी आज़ादी है।
- अनुच्छेद 21 – Right to Life: यह सबसे शक्तिशाली अनुच्छेद है। बिना कानूनी प्रक्रिया के कोई आपकी आज़ादी नहीं छीन सकता।
- अनुच्छेद 21A – Right to Education: 6–14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार।
- अनुच्छेद 32 – Soul of the Constitution: डॉ. अंबेडकर ने इसे “संविधान की आत्मा” कहा था क्योंकि अगर आपके अधिकारों का हनन हो, तो आप सीधे Supreme Court जा सकते हैं।
1.2 केंद्र और राज्य सरकार (Important Articles)
- अनुच्छेद 72: राष्ट्रपति के पास “Pardon” (क्षमादान) करने की शक्ति है, वो फांसी की सज़ा भी रुकवा सकते हैं।
- अनुच्छेद 74–75: प्रधानमंत्री और उनकी Council of Ministers कैसे काम करेगी, इसका पूरा ब्यौरा।
- अनुच्छेद 124: हमारी सबसे बड़ी अदालत—Supreme Court की संरचना और शक्तियां।
- अनुच्छेद 214: राज्यों के लिए High Courts का प्रावधान।
2. महत्वपूर्ण संविधान संशोधन (Constitutional Amendments)
संविधान में सुधार करने को Amendment कहते हैं। अब तक 100 से ज़्यादा संशोधन हो चुके हैं, पर ये कुछ सबसे महत्वपूर्ण हैं:
- 42वाँ संशोधन (1976): इसे “Mini Constitution” कहा जाता है। इसने प्रस्तावना (Preamble) में “Secular” और “Socialist” जैसे शब्द जोड़े।
- 44वाँ संशोधन (1978): संपत्ति के अधिकार (Right to Property) को मूल अधिकार से हटाकर एक कानूनी अधिकार बनाया गया।
- 61वाँ संशोधन (1989): वोट देने की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
- 73वाँ और 74वाँ संशोधन (1992): पंचायतों और नगर पालिकाओं (Municipalities) को संवैधानिक दर्जा मिला।
- 101वाँ संशोधन (2016): इसी के माध्यम से भारत में GST लागू किया गया।
3. नीति निदेशक तत्त्व (DPSP) – अनुच्छेद 36 से 51
DPSP का मतलब है “सरकार के कर्तव्य”। ये कोर्ट द्वारा जबरदस्ती लागू नहीं कराए जा सकते, लेकिन एक अच्छी सरकार के लिए इन सिद्धांतों को मानना ज़रूरी है। इन्हें 3 श्रेणियों में समझें:
- सामाजिक और आर्थिक सिद्धांत: सबको काम और शिक्षा के समान अवसर मिलें और न्यूनतम मज़दूरी (Minimum Wage) सुनिश्चित हो।
- गांधीवादी सिद्धांत: ग्राम पंचायतों को मज़बूत बनाना और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना।
- उदारवादी सिद्धांत: अंतरराष्ट्रीय शांति (International Peace) बनाए रखना और पर्यावरण की रक्षा (Art. 48A) करना।
4. मूल अधिकार और DPSP में संबंध
Fundamental Rights नागरिकों को सुरक्षा देते हैं, जबकि DPSP सरकार को विकास का रास्ता दिखाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ये दोनों “एक ही सिक्के के दो पहलू” (Two sides of the same coin) हैं।